कोरोना और हमारा घर - a short poem

थक कर आता था 
तो सुलाता था घर  
आज भी हर मुसीबत 
से बचाता  है घर 

बाहर  खतरा मंडरा रहा है 
हम एकजुट कैसे हो 
ये हमें सिखाता है घर 

बचपन बीता  जो जैसे बहोत पुरानी  बात 
आज याद बचपन की दिलाता है घर 
source  - int 

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